रविवार के दिन करें सूर्यनारायण की आरती, शारीरिक कष्टों से पाएं मुक्ति

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रविवार का दिन भगवान सूर्य नारायण को समर्पित है। भगवान सूर्यनारायण सृष्टि के जागृत देव माने जाते है। रविवार के दिन भगवान सूर्य की पूजा अर्चना कर उनकी आरती करने से भगवान सूर्य प्रसन्न होते है और भक्तों को मनचाहा वर प्रदान करते है। हम आपके लिए लेकर आए है भगवान सूर्यनारायण की २ सबसे ज्यादा प्रचलित आरती:

।। आरती श्री सूर्यदेव की-१ ।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा
धरत सब ही तव ध्यान,
ॐ जय सूर्य भगवान….

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी, तुम चार भुजाधारी
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे,
तुम हो देव महान
ॐ जय सूर्य भगवान….

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते, सब तब दर्शन पाते
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा
करे सब तब गुणगान
ॐ जय सूर्य भगवान….

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते, गोधन तब घर आते
गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में
हो तव महिमा गान
ॐ जय सूर्य भगवान….

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते, आदित्य हृदय जपते
स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी
दे नव जीवनदान
ॐ जय सूर्य भगवान….

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार, महिमा तब अपरम्पार
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते
बल, बुद्धि और ज्ञान
ॐ जय सूर्य भगवान….

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं, सब जीवों के प्राण तुम्हीं
वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने
तुम ही सर्वशक्तिमान
ॐ जय सूर्य भगवान….

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल, तुम भुवनों के प्रतिपाल
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी
शुभकारी अंशुमान
ॐ जय सूर्य भगवान….

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा
धरत सब ही तव ध्यान,
ॐ जय सूर्य भगवान


     

      ।। आरती श्री सूर्यदेव की-२ ।।

जय कश्यप नन्दन, स्वामी जय कश्यप नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
जय कश्यप नन्दन …

सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
जय कश्यप नन्दन …

सुर मुनि भूशर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप नन्दन …

सकल सुकर्म प्रसाविता, साविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
जय कश्यप नन्दन …

कमल समूह विकाशक, नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरता अति, मनसिज संतापा॥
जय कश्यप नन्दन …

नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप नन्दन …

सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप नन्दन …

जय कश्यप नन्दन, स्वामी जय कश्यप नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
जय कश्यप नन्दन …

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