“श्री शिव बिल्वाष्टकम स्त्रोतम” (Shiv Bilvashtakam Strotam) हिन्दी अनुवाद सहित

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भगवान शिव को जो पत्र पुष्प प्रिय हैं उनमे बिल्बपत्र प्रमुख है। बिल्बपत्र को शिव पर अर्पित करने से धन- संपत्ति ,ऐश्वर्य प्राप्त होता है। लिंगपुराण के अनुसार बिल्ब पत्र में देवी लक्ष्मी का वास माना जाता है। ऋग्वेदोक्त श्री सूक्त के अनुसार माँ लक्ष्मी  के तपोबल से बिल्बपत्र उत्पन्न हुआ, इसीलिए यह दरिद्रता को दूर करने वाला है, न केवल बाहरी बल्कि भीतरी दरिद्रता को भी दूर करने में समर्थ है।

श्रावण के महीने में 108 बिल्व पत्रों पर चंदन से “ॐ नमः शिवाय” लिखकर इसी मंत्र का जप करते हुए शिवजी को अर्पित करने से घर में सुख-शांति एवं समृद्धि आती है। किसी भी प्रकार की परेशानी दूर करने के लिए या मनोकामना पूर्ती के लिए 1008 बिल्व पत्र शिव सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए अर्पित करें।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार शिवरात्रि के दिन जो भी भगवान शंकर को जितने भी बिल्वपत्र चढ़ाता है, वह उतने युगों तक कैलास में सुख पूर्वक वास करता है। पुनः श्रेष्ठ योनि में जन्म लेकर भगवान शिव का परम भक्त होता है। विद्या, पुत्र, सम्पत्ति, प्रजा और भूमि-ये सभी उसके लिए सुलभ रहते हैं।

बिल्वाष्टक बोलते हुए तीन पत्ती वाला बिल्व पत्र शिवलिंग पर इस तरह समर्पित करें की चिकना भाग नीचे रह कर शिवलिंग को स्पर्श करे।

।। अथ श्री बिल्वाष्टकम ।।

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्
त्रिजन्मपाप संहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥१

तीन दलवाला सत्व, रज एवं तमः स्वरूप सूर्य चंद्र तथा अग्नित्रिनेत्र स्वरूप और आयुधत्रय स्वरूप तथा तीनों जन्मो के पापों को नष्ट करने वाला यह बिल्वपत्र मैं भगवान शिव को समर्पित करता हूँ।

त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्र्च अच्छिद्रै: कोमलैः शुभैः
शिवपूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥२

छिद्र रहित सुकोमल तीन पत्ते वाले मंगल प्रदान करने वाले इस बिल्वपत्र को मैं भगवान शिव की पूजा में समर्पित करता हूँ।

अखण्ड बिल्व पात्रेण पूजिते नन्दिकेश्र्वरे
शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥३

अखंड बिल्व पत्र से नंदिकेश्वर भगवान की पूजा करने पर मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर शुद्ध हो जाता हैं। मैं यह बिल्वपत्र शिव को समर्पित करता हूँ।

शालिग्राम शिलामेकां विप्राणां जातु चार्पयेत्
सोमयज्ञ महापुण्यं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥४

मेरे द्वारा भगवान शिव को समर्पित किया गया यह बिल्वपत्र, ब्राह्मणो को शालिग्राम की शिला के समान तथा सोमयज्ञ के अनुष्ठान के समान महान पुण्यशाली हो, अतः मैं यह बिल्वपत्र भगवान शिव को समर्पित करता हूँ।

दन्तिकोटि सहस्राणि वाजपेय शतानि च
कोटि कन्या महादानं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥५

मेरे द्वारा भगवान शिव को समर्पित किया गया यह बिल्वपत्र, हजारों करोड़ गजदान सैंकड़ों बाजपेय यज्ञ के अनुष्ठान तथा करोड़ों कन्यायों के महादान के समान हो अतः मैं यह बिल्वपत्र भगवान शिव को समर्पित करता हूँ।

लक्ष्म्या स्तनुत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम्
बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥६

विष्णु प्रिय भगवती लक्ष्मी के वक्ष स्थल से प्रादुर्भूत तथा महादेव जी के अत्यंत प्रिय बिल्व वृक्ष का पत्र अर्थात यह बिल्वपत्र भगवान शिव को समर्पित करता हूँ।

दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्
अघोरपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥७

बिल्व वृक्ष का दर्शन और उसका स्पर्श समस्त पापों को नष्ट करने वाला तथा अनेकों पापों का संहार करने वाला है, यह बिल्वपत्र मैं भगवान शिव को समर्पित करता हूँ।

मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे
अग्रतः शिवरूपाय एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥८

बेल पत्र का मूल भाग ब्रह्मरूप है, मध्य भाग विष्णु रूप एवं अग्रभाग शिवरूप है ऐसा यह बिल्व पत्र भगवान शिव को समर्पित है।

बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ
सर्वपाप विनिर्मुक्तः शिवलोकमवाप्नुयात् ॥

जो भगवान शिव के समीप पुण्य प्रदान करने वाले इस बिल्वाष्टक का पाठ करता है वह समस्त पापोंसे मुक्त होकर अंत में शिवलोक को प्राप्त करता है।

।। इति श्री बिल्वाष्टकम संपूर्णम् ।।

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