जब एक राक्षस भगवान श्रीराम के रूप पर हो गया था मोहित

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आज हमारे पाठकों के लिए हिन्दुबुक के पन्नो से हम आपके लिए लेकर आए है, श्रीरामचरितमानस से प्रभु श्रीरामचन्द्र जी के अनुपम सौंदर्य के वर्णन का एक अद्भुत प्रसंग:

ज़रा कल्पना करिए प्रभु रामचंद्रजी के अनुपम रूप सौंदर्य की।

लक्ष्मण ने शूर्पणखा के नाक कान काटकर जब कुरूपा बना कर भगा दिया, खर-दूषण आग बबूला होकर आ रहे थे कि हमारी बहन को नकटी बनाने वाले को जीवित रहने का अधिकार नही। पर आकर के ज्यों रामजी के मुखारविन्द को देखा, दीवाना हो गया। खर दूषण की सेना रामजी पर आक्रमण करने को उतावली हो रही थी, खरदूषण ने सबको रोक दिया। सेनापतियों ने कारण पूछा, तो खरदूषण कहने लगे, “यदि इसी ने हमारी बहन को विरूपा बनाया है, काम तो अवश्य इसने मृत्युदंड पाने योग्य ही किया है लेकिन फिर भी मन कहता है कि ये रूपवान पुरुष वध के योग्य नही है। इतना प्यारा, इतना सुंदर, इतना मनमोहक, इतना अनुपम स्वरूप वाला पुरुष मैंने आज तक नही देखा। बाबा तुलसीदास जी लिखते है-

“यद्यपि भगिनी किन्ही कुरूपा। वध लायक नही पुरुष अनूपा।।

कौन बोल रहा है- राक्षस। कौन सा राक्षस- खरदूषण, जिसकी बहन को अभी अभी कुछ समय पहले ही नकटी किया गया। अब बताइये, कौन सा भाई अपनी बहन का अपमान करने वाले के बारे में ऐसी बाते करता है? सिंगल हड्डी का मनुष्य होगा तो भी ऐसी घटना पर मरने मारने को तैयार हो जाए। फिर ये तो खर-दूषण थे। वह खर-दूषण जिनका रावण जैसा पराक्रमी भाई था, उसको अपनी बहन के अपमान पर कितना क्रोध आया होगा। वह खर-दूषण जिनके बारे में स्वयं रावण कहता था कि-

“खर दूषन मोहि सम बलवंता। तिन्हहि को मारइ बिनु भगवंता॥

और वही खर-दूषण प्रभु श्रीराम के मनमोहक सौंदय पर सम्मोहित हो अपनी बहन का अपमान तक भूलने को तैयार था। सारा क्रोध पानी पानी हो गया। कहता है- “यद्यपि भगिनी किन्ही कुरूपा”, अवश्य ही इसने मेरी बहन को कुरूप बनाया है लेकिन फिर भी- “वध लायक नही”, ये आदमी वध कर देने योग्य नही है। क्यो? क्योंकि – “पुरुष अनूपा”, ये अनुपम पुरुष है अर्थात इसकी उपमा का कोई और पुरुष इस संसार मे नही है।

और ये हाल तब है जब भगवान कोई राजसी वेषभूषा में साज-सौंदर्य करके नही बैठे है बल्कि तपस्वियों की भांति साधारण मुनि-वेश धारण किया हुआ है-

“तापस वेष बिसेषी उदासी, चौदह बरिस रामु बनबासी”

अब ज़रा विचार कीजिए जब साधु वेष का ये चमत्कार है कि राक्षस तक मोहित हो जाते है, तो दूल्हा सरकार बनकर जब मिथिला गए होंगे तब वहां क्या हाल हुआ होगा!

।। जय श्री राम ।।

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