भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा

शेयर करना न भूलें :

दशावतार कथाएँ : प्रथम भाग : मत्स्य अवतार

भगवान श्रीहरि विष्‍णु धर्म की रक्षा हेतु हर काल में अवतार लेते है। वैसे तो भगवान विष्णु के अनेक अवतार हुए हैं लेकिन उनमें 10 अवतार ऐसे हैं, जो प्रमुख रूप से स्थान पाते हैं। Hindubook.in के हमारे प्यारे पाठकों के लिए आज हम प्रभु के प्रथम अवतार “मत्स्य अवतार” की कथा लेकर आए है।

पुराणों के अनुसार भगवान श्रीहरि विष्णु ने सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए मत्स्यावतार लिया था। इसकी कथा इस प्रकार है:-

कृतयुग (सतयुग) के आदि में राजा सत्यव्रत मनु हुए। राजा सत्यव्रत मनु एक दिन नदी में स्नान कर जलांजलि दे रहे थे। अचानक उनकी अंजलि में एक छोटी सी मछली आई। उन्होंने देखा तो सोचा वापस सागर में डाल दूं, लेकिन उस मछली ने राजा मनु से कहा- आप मुझे सागर में मत डालिए अन्यथा बड़ी मछलियां मुझे खा जाएंगी। तब राजा सत्यव्रत ने मछली को अपने कमंडल में रख लिया। मछली और बड़ी हो गई तो राजा ने उसे अपने सरोवर में रखा, तब देखते ही देखते मछली और बड़ी हो गई।

राजा को समझ आ गया कि यह कोई साधारण जीव नहीं है। राजा ने मछली से वास्तविक स्वरूप में आने की प्रार्थना की। राजा मनु की प्रार्थना सुन साक्षात भगवान विष्णु अपने चतुर्भुज रूप में प्रकट हो गए और उन्होंने कहा कि ये मेरा “मत्स्यावतार” है।

भगवान ने सत्यव्रत मनु से कहा- सुनो राजा सत्यव्रत! आज से सात दिन बाद प्रलय होगी। तब मेरी प्रेरणा से एक विशाल नाव तुम्हारे पास आएगी। तुम चारों वेदों, सप्त ऋषियों, औषधियों, बीजों व प्राणियों के सूक्ष्म शरीर को लेकर उसमें बैठ जाना, जब तुम्हारी नाव डगमगाने लगेगी, तब मैं मत्स्य के रूप में तुम्हारे पास आऊंगा। उस समय तुम वासुकि नाग के द्वारा उस नाव को मेरे सींग से बांध देना। उस समय प्रश्न पूछने पर मैं तुम्हें उत्तर दूंगा, जिससे मेरी महिमा जो परब्रह्म नाम से विख्यात है, तुम्हारे ह्रदय में प्रकट हो जाएगी।

तब समय आने पर मत्स्यरूपधारी भगवान विष्णु ने राजा सत्यव्रत मनु को तत्वज्ञान का उपदेश दिया, जो “मत्स्यपुराण” नाम से प्रसिद्ध है। भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार में ही “हयग्रीव” नामक दैत्य का अंत भी किया था, जिसने ब्रह्मा के मुख से प्रकट हुए चारों वेदों को बंदी बना लिया था। हयग्रीव का अंत कर भगवान विष्णु ने चारों वेदों को मुक्त करवाया था।

“बोलिए मत्स्यावतार भगवान श्रीहरि विष्णु की जय” 

शेयर करना न भूलें :

Leave a Reply

You cannot copy content of this page