कथा महर्षि मार्कण्डेय जी की, जिनके भाग्य में लिखी थी कम उम्र, शिव की कृपा से बन गए चिरंजीवी

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अष्टचिरंजीवियों में से एक है महर्षि मार्कण्डेय जी। विशेष बात की ये 16 वर्ष की अल्पायु लेकर जन्मे थे। भगवान शिव के वरदान से इनका जन्म ऋषि मृगश्रृंग के घर हुआ। वरदान देते समय ही भगवान शिव ने स्पष्ट कह दिया था कि तुम्हारा पुत्र 16 वर्ष की अल्पायु का होगा। जब मार्कण्डेय जी का जन्म हुआ, तभी से उनके पिता अपने पुत्र की अल्पायु को लेकर चिंतित रहने लगे। अंतिम उपाय उन्होंने ये सोचा की जब शिवजी ने ही पुत्र दिया है तो अल्पायु का मामला भी शिवजी ही संभालेंगे।

पिता ने जन्म से ही मार्कण्डेय जी को भगवान शिव की भक्ति करने को कहा। मार्कण्डेय जी भगवान शिव की घनघोर भक्ति करने लगे और जब अंत समय यम के दूत मार्कण्डेय जी को लेने आये तब मार्कण्डेय जी शिवलिंग से ही लिपट गए। भगवान शिव जी प्रकट हुए और काल को छाती पर लात मार कर दूर किया। कालदूत बोले महाराज ये तो विधि का विधान है। शिवजी ने कहा “मैं कुछ नही जानता, ये मेरी शरण आया है, इसकी रक्षा करना करना ही मेरा धर्म है। विधि का विधान है तो विधान में संशोधन हो जाएगा।

और आख़िर यही हुआ, ब्रह्मा जी को संविधान में संशोधन करना पड़ा। ब्रह्मा जी ने अपनी आयु में से 5 वर्ष की आयु महर्षि मार्कण्डेय को प्रदान की। भक्ति की शक्ति देखिए, जो बालक 16 वर्ष की अल्पायु को लेकर जन्मा था, वो न केवल दीर्घायु हुए बल्कि अपनी भक्ति के बल पर अष्ट चिरंजीवियों में स्थान भी प्राप्त किए। कई लोगो के मन में ये संशय होगा की ब्रह्मा जी ने तो केवल 5 वर्ष की आयु प्रदान की थी, फिर मार्कण्डेय जी चिरंजीवी कैसे हुए?

शास्त्रों में ब्रह्मा जी आयु 100 वर्ष की बताई गई है, जिसमे से 5 वर्ष उन्होंने महर्षि मार्कण्डेय जी को दिए। शास्त्रों में ही, ब्रह्मा जी की आयु गणना भी दी हुई है जो इस प्रकार है:-

15 निमेष की 1 काष्ठा होती है..
30 काष्ठा की 1 कला,
30 कला का 1 मुहूर्त, और
30 मुहूर्त का मनुष्यो का 1 दिन रात होता है।

15 दिन रात का 1 पक्ष होता है,
2 पक्षो (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) का 1 मास।
6 मास का 1 अयन और
2 अयन (उत्तरायण और दक्षिणायन) का 1 वर्ष।

उत्तरायण देवताओं का दिन है और दक्षिणायन देवताओं की रात्रि, इस प्रकार 2 अयन ( उत्तरायण और दक्षिणायन) मिलाकर देवताओं का एक दिन होता है।

मानवी वर्षों के अनुसार सतयुग, त्रेता, द्वापर आदि युगों में वर्ष संख्या :-
सतयुग की आयु है – 17 लाख 28 हज़ार वर्ष..
त्रेतायुग की आयु है – 12 लाख 96 हज़ार वर्ष..
द्वापर की आयु है- 8 लाख 64 हज़ार वर्ष..
कलयुग की आयु है- 4 लाख 32 हज़ार वर्ष..

चारों युगों को मिलाकर बनता है एक चतुर्युग, और एक चतुर्युग में होते है- 43 लाख 20 हज़ार मानव वर्ष..

चारों युग जब एक हज़ार बार बीत जाये, याने 1 हज़ार चतुर्युगी का ब्रह्मा जी का एक दिन होता है, और इतने बड़े एक दिन के हिसाब से ब्रह्मा जी की 100 वर्ष की आयु है। जिसमे से ब्रह्मा जी की आयु के 50 वर्ष पूरे हो चुके है।

ब्रह्मा जी के एक दिन को ही ‘कल्प’ कहते है, और ब्रह्मा जी के एक दिन अर्थात एक कल्प में 14 मन्वन्तर होते है, और एक मन्वन्तर में 71 चतुर्युग होते है।

ब्रह्मा जी के एक दिन में 14 मन्वन्तर होते है और वर्तमान में 7 वें मन्वन्तर का ये 28 वें नम्बर का कलियुग चल रहा है जिसके लगभग 6 हज़ार वर्ष बीत चुके है।

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