“श्रीगणपति संकटनाशन स्तोत्र” के पाठ से अपने हर संकट को करें दूर

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भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं, विद्यादाता हैं, धन-संपत्ति देने वाले है, गौरीपुत्र गणपति जीवन की हर परेशानी को दूर करने वाले है।  श्रीगणेश जी की उपासना करने से आपके सभी संकट मिट जाते है। जीवन के समस्त विघ्नों को हरने वाले एवं बुद्धि और यश के देवता भगवान गणेश की अराधना करने के वैसे तो कई तरीके हैं लेकिन उन्हें उनके विभिन्न स्त्रोत को पढ़कर प्रसन्न किया जा सकता है। ऐसा ही एक चमत्कारिक स्तोत्र है “श्री गणपति संकट नाशन स्तोत्र”

श्री गणपति संकटनाशन स्तोत्र का वर्णन हमे नारद पुराण में मिलता है। मान्यता है की इस स्तोत्र का पाठ करने से आप अपने जीवन की हर परेशानी दूर कर सकते है। तो आइए हम और आप मिलकर सच्ची श्रद्धा भक्ति से “श्री गणेश संकट नाशन स्तोत्र” का पाठ करें :

।। अथ श्री गणपति संकटनाशन स्तोत्र ।।

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्
भक्तावासं स्मरेनित्यम आयुष्कामार्थ सिध्दये ॥१॥

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्
तृतीयं कृष्णपिङगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥२॥

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धुम्रवर्णं तथाषष्टम ॥३॥

नवमं भालचंद्रं च दशमं तु विनायकम्
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥४॥

द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर:
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिध्दीकर प्रभो ॥५॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम ॥६॥

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षडभिर्मासे फलं लभेत्
संवत्सरेण सिध्दीं च लभते नात्र संशय: ॥७॥

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्पयेत
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ॥८॥

॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥

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