बुधवार व्रत कथा

शेयर करना न भूलें :

बुधवार को बुधदेव का दिन माना जाता है और इसका संबंध बुद्धि या ज्ञान से होता है, वहीं बुध ग्रह ज्ञान, कार्य, बुद्धि, व्यापार आदि का कारक है। यदि किसी जातक की कुंडली में बुध नीच का बैठा हो तो उन्हें बुध ग्रह के कुप्रभाव से बचने के लिए बुधवार का व्रत रखने की सलाह दी जाती है। दूसरी ओर बुधवार के दिन कई जगह सर्व संकट हरण भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। मान्यता अनुसार ऐसा करने से घर में कभी धन धन्य की कमी नहीं होती है, फिजूल खर्च से बचत होती है, घर में क्लेश नहीं होता है और सारे संकट टल जाते है।

बुधवार व्रत की विधि :

बुधवार व्रत करने वाले को इस दिन प्रातः उठकर संपूर्ण घर की सफाई करनी चाहिए, तत्पश्चात स्नानादि से निवृत्त हो जाएँ। इसके बाद घर के ही किसी पवित्र स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठ कर भगवान बुध, भगवान गणेश या शंकर भगवान की मूर्ति अथवा चित्र किसी कांस्य पात्र में स्थापित करें। पूजा करने से पहले संकल्प लें क्योंकि किसी भी पूजा को शुरु करने से पहले संकल्प लेना आवश्यक है। तत्पश्चात धूप, बेल-पत्र, अक्षत और घी का दीपक जलाकर पूजा करें।

इसके बाद निम्न मंत्र से बुध की प्रार्थना करें- बुध त्वं बुद्धिजनको बोधदः सर्वदा नृणाम्‌। तत्वावबोधं कुरुषे सोमपुत्र नमो नमः॥

अगर आप गणेश भगवान जी की उपासना कर रहे है तो “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें

बुधवार की व्रतकथा सुनकर आरती करें। इसके पश्चात गुड़, भात और दही का प्रसाद बाँटकर स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।

बुधवार व्रत की कथा :

प्राचीन समय की बात है। समतापुर नगर में मधुसूदन नामक एक व्यक्ति रहता था जिसका विवाह बलरामपुर नगर की एक सुंदर और गुणवंती कन्या संगीता से हुआ था। एक बार मधुसूदन की पत्नी अपने मायके गई थी, थोड़े दिनों बाद मधुसूदन भी अपनी पत्नी को वापस लिवाने गया। मधुसूदन ने अपने सास-श्वसुर से संगीता को विदा कराने के लिए कहा। माता-पिता बोले- “बेटा, आज बुधवार है। बुधवार को किसी भी शुभ कार्य के लिए यात्रा करना अशुभ फलदायक होता है।” लेकिन मधुसूदन नहीं माना और उसी दिन अपनी पत्नी को लेकर निकल पड़ा।

दोनों ने बैलगाड़ी से यात्रा प्रारंभ की, दो कोस की यात्रा के बाद उसकी गाड़ी का एक पहिया टूट गया। वहाँ से दोनों ने पैदल ही यात्रा शुरू की। रास्ते में संगीता को प्यास लगी। मधुसूदन उसे एक पेड़ के नीचे बैठाकर जल लेने चला गया। थोड़ी देर बाद जब मधुसूदन कहीं से जल लेकर वापस आया तो वह बुरी तरह हैरान हो उठा क्योंकि उसकी पत्नी के पास उसकी ही शक्ल-सूरत का एक दूसरा व्यक्ति बैठा था। संगीता भी मधुसूदन को देखकर हैरान रह गई। वह दोनों में कोई अंतर नहीं कर पाई।

मधुसूदन ने उस व्यक्ति से पूछा- “तुम कौन हो और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठे हो?” मधुसूदन की बात सुनकर उस व्यक्ति ने कहा- “अरे भाई! यह मेरी पत्नी संगीता है। मैं अपनी पत्नी को ससुराल से विदा करा कर लाया हूँ। लेकिन तुम कौन हो जो मुझसे ऐसा प्रश्न कर रहे हो?”

मधुसूदन ने हैरान परेशान होते हुए कहा- “तुम जरूर कोई चोर या ठग हो। यह मेरी पत्नी संगीता है। मैं इसे पेड़ के नीचे बैठाकर जल लेने गया था।”

दोनों एक-दूसरे से लड़ने लगे। उन्हें लड़ते देख बहुत से लोग वहाँ एकत्र हो गए। नगर के कुछ सिपाही भी वहाँ आ गए। सिपाही उन दोनों को पकड़कर राजा के पास ले गए। सारी कहानी सुनकर राजा भी कोई निर्णय नहीं कर पाया। संगीता भी उन दोनों में से अपने वास्तविक पति को नहीं पहचान पा रही थी। राजा ने दोनों को कारागार में डाल देने के लिए कहा। राजा के फैसले पर असली मधुसूदन भयभीत हो उठा।

तभी आकाशवाणी हुई- “मधुसूदन! तूने संगीता के माता-पिता की बात नहीं मानी और बुधवार के दिन अपनी ससुराल से प्रस्थान किया। यह सब भगवान बुधदेव के प्रकोप से हो रहा है।”

मधुसूदन ने भगवान बुधदेव से प्रार्थना की कि “हे भगवान बुधदेव मुझे क्षमा कर दीजिए। मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई। भविष्य में अब कभी बुधवार के दिन यात्रा नहीं करूँगा और सदैव बुधवार को आपका व्रत किया करूँगा।”

मधुसूदन के प्रार्थना करने से भगवान बुधदेव ने उसे क्षमा कर दिया। तभी दूसरा व्यक्ति राजा के सामने से गायब हो गया। राजा और दूसरे लोग इस चमत्कार को देख हैरान हो गए। भगवान बुधदेव की इस अनुकम्पा से राजा ने मधुसूदन और उसकी पत्नी को सम्मानपूर्वक विदा किया।

कुछ दूर चलने पर रास्ते में उन्हें बैलगाड़ी मिल गई। बैलगाड़ी का टूटा हुआ पहिया भी जुड़ा हुआ था। दोनों उसमें बैठकर समतापुर की ओर चल दिए। मधुसूदन और उसकी पत्नी संगीता दोनों बुधवार को व्रत करते हुए आनंदपूर्वक जीवन-यापन करने लगे। भगवान बुधदेव की अनुकम्पा से उनके घर में धन-संपत्ति की वर्षा होने लगी। जल्दी ही उनके जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ भर गईं।

जो व्यक्ति इस कथा का श्रवण हर बुधवार को सुनता है तो उसे बुधवार के दिन गमन का कोई दोष नहीं लगता है और उसके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

यह भी पढ़े : 5 अगस्त 2020 हिन्दू स्वाभिमान का विजय दिवस

शेयर करना न भूलें :

Leave a Reply


Notice: Undefined variable: user_display_name in /home/thelkljs/hindubook.in/wp-content/plugins/secure-copy-content-protection/public/class-secure-copy-content-protection-public.php on line 733
You cannot copy content of this page