अभिजीति मुहूर्त : जिस मुहूर्त में जन्मे थे श्रीराम, उसी शुभ मुहूर्त में होगा भूमिपूजन

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5 अगस्त 2020, यह वो ऐतिहासिक दिन है जब करोड़ो हिंदुओ के स्वाभिमान का, वर्षों से चले आ रहे संघर्ष का एक पड़ाव पूर्ण होगा। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद अयोध्या स्थित श्रीरामजन्मभूमि पर श्री रामलला के भव्य मंदिर का भूमिपूजन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के हाथों होने जा रहा है। 5 अगस्त 2020 को दोपहर में 12 बजकर 15 मिनट और 15 सेंकड पर सर्वश्रेष्ठ “अभिजीति मुहूर्त” में मंदिर निर्माण की नींव रखी जाएगी, और इसी के साथ अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। मंदिर निर्माण के नींव की पहली ईंट शुद्ध चांदी से बनी हुई है जिसका वजन लगभग साढ़े बाइस किलो है। कुछ लोग भूमिपूजन के दिन और समय को लेकर सवाल खड़े कर रहे है कि इस दिन तो कोई शुभ मुहूर्त है ही नही, उन्हें पता होना चाहिए कि वैसे तो भगवान के कार्यो में मुहूर्त नही देखे जाते फिर भी मंदिर निर्माण का भूमिपूजन “अभिजीति मुहूर्त” में होने जा रहा है, उसी अभिजीति मुहूर्त में जिसमे श्रीराम का जन्म हुआ था।

श्रीरामचरितमानस में बाबा तुलसीदास जी लिखते है:
“नवमी तिथि मधुमास पुनिता। सुकल पक्ष अभिजीति हरिप्रीता।।
मध्यदिवस अतिशीत न घामा। पावन काल लोक विश्रामा।।”

इन पंक्तियों से स्पष्ट होता है की, प्रभु श्रीराम का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमीं तिथि को उस वक्त हुआ था जब चन्द्रमा अभिजीति नक्षत्र में थे। अभिजीति मुहूर्त प्रतिदिन दिन के मध्यकाल अर्थात दिन के 11:45 AM से 12:35 PM के बीच रहता है। मुहूर्त का स्पष्ट काल सूर्योदय के समय पर निर्भर करता है जो स्थान स्थान के हिसाब से 5-10 मिनट आगे पीछे रहता है। स्पष्ट है कि प्रभु श्रीराम का जन्म इसी अभिजीति मुहूर्त में अर्थात दिन के 12 से 12:30 के बीच हुआ था। और जहाँ उनका जन्म हुआ था, वही उनके भव्य मंदिर का निर्माण कार्य अब शुरू होने जा रहा है, तथा मंदिर का भूमिपूजन उसी शुभ मुहूर्त में होगा जिस मुहूर्त में श्रीराम जन्मे थे।

ज्योतिष में अभिजीति मुहूर्त का बड़ा महत्व है। यह एक अबूझ मुहूर्त कहा जाता है, अर्थात इस मुहूर्त में किया गया कार्य कई गुना फलदायी होता है। अगर किसी शुभ कार्य के आरम्भ के लिए कोई मुहूर्त न बन रहा हो तो वह कार्य अभिजीति मुहूर्त में सम्पन्न किया जा सकता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह मुहूर्त सूर्योदय से सूर्यास्‍त तक के बीच के 15 मुहूर्तों में से आठवें नंबर का और सबसे अच्‍छा होता है। आमतौर पर एक मुहूर्त का समय 48 मिनट का होता है, लेकिन उसमे भी ज्योतिष गणना द्वारा स्पष्ट काल और स्पष्ट मुहूर्त निकाला जाता है जो कि सूर्योदय के समय पर निर्भर करता है। जहाँ तक बात है अभिजीति मुहूर्त की तो आकाश मंडल में मध्‍य की स्थिति में होने से इसे स्‍वयं सिद्ध माना जाता है। इसकी विशिष्‍टता यह भी है कि बिना विशेष योग के भी इस मुहूर्त में किया गया कार्य फलदायी होता है। इस समय में कोई भी कार्य करने पर विजय प्राप्त होती है। मान्यताओं के अनुसार यदि किसी भी शुभ काम में लग्न का आभाव हो तो अभिजीत मुहूर्त का प्रयोग करना चाहिए।

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