आरती श्री जगदीश्वर जी की, ॐ जय जगदीश हरे

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विश्व भर में सबसे ज्यादा लोकप्रिय आरती ओम जय जगदीश हरे पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा सन १८७० में लिखी गई थी। परमपूज्य पं. श्रद्धाराम शर्मा या श्रद्धाराम फिल्लौरी जी सनातन धर्म प्रचारक, ज्योतिषी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संगीतज्ञ तथा हिन्दी और पंजाबी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। पंडित जी को हिन्दी साहित्य का पहला उपन्यासकार भी माना जाता है।

वैसे तो यह आरती मूलतः भगवान विष्णु को समर्पित है फिर भी इस आरती को किसी भी पूजा, पर्व उत्सव पर गाया / सुनाया जाता है।

आरती श्री जगदीश्वर की 

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे…॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का,
स्वामी दुःख बिनसे मन का ।
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे…॥

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी,
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे…॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी,
स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे…॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख फलकामी, कृपा करो भर्ता॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे…॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे…॥

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता, ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी रक्षक तुम मेरे ।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे…॥

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा,
स्वामी पाप(कष्ट) हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे…॥

तन मन धन मेरा जीवन, सब कुछ है तेरा,
स्वामी सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे…॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे…॥

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